
मै हारमोनियम रात के भीतर बजा रहा था
गाना जो था वह अँधेरे में इतनी दूर तक जाता था
कि मै देख नहीं पाता था ,
फिर एक पतली-सी दरार मुझे दिखी
मै उसमें घुस गया
और अँधेरे की दो परतों के बीच नींद में डूबे पानी जैसा
दूर तक दौड़ने लगा ,
वहाँ बीस साल से एक लड़की थी , जो बिना कभी दिखे
सोती जा रही थी
वह जागी तो नहीं लेकिन नींद में ही हँसी ,
अँधेरे में गाना था और पानी जैसा जो बह रहा
वह मैं था ,
फिर तो मैं भी हँसने लगा रात में ही
अँधेरे में छुपा हुआ ,
एक मोटा अधेड़ उम्र का आदमी
साईंबाबा की फोटो के नीचे पिस्ता खा रहा था
उसने बंदूक से मुझे डराया
यों आँखें फाड़कर और मुँह को यूँ -यूँ करके ,
वह तो बाप निकला लड़की का ,जो गुस्से में था
और सो भी नहीं रहा था बीस साल से
लड़की के सपनों की पहरेदारी में
मै क्या करता ? धप्प से कूदकर बाहर निकल आया
और उजाले में डरावने आदमी से नमस्ते करने लगा ,
लेकिन मेरा हारमोनियम तो
रात में ही रह गया था ,बहुत पीछे
और वह बज रहा था
और लड़की हँसे क्यों जा रही थी
यह कहना मुश्किल था ।
बहुत ही रहस्यात्मक रचना.......कई अर्थो को एक साथ समेटे..बहुत सुंदर।
ReplyDeleteसपने में बजते हारमोनियम कभी सच नहीं होते.. सुबह होते ही छूट जाते हैं.. अक्सर लडकियां सपने में ही हंसती हैं... अच्छी कविता..
ReplyDeleteबहुत मार्मिक कविता है । बिल्कुल एक सपने जैसी । शायद किसी दर्दनाक घटना से प्रेरित होकर लिखी गई है ।
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ReplyDeleteयशस्वी कवि कथाकार उदय प्रकाश जी की यह कविता अनगिनत व्यंजनाओं को समेटे अपने समय की बड़ी कविता है और इसी कविता के शीर्षक से उनकी मशहूर किताब है -- ''रात में हारमोनियम'' !
ReplyDeleteबहुत मार्मिक कविता है, एक सपने जैसी !
ReplyDeleteपहली बार आपके व्लाग पर आयाऔर बहुत खुबसूरत कविता पढने की मिली , बधाई
रात में हारमोनियम...
ReplyDeleteबेहतर प्रस्तुति...
धन्यवाद,
ReplyDeleteसुशीला जी ,अपने और मेरे भी प्रिय रचनाकार की कविता प्रस्तुत करने के लिए. बहुत ही अच्छा लगा.
वहाँ बीस साल से एक लड़की थी , जो बिना कभी दिखे
ReplyDeleteसोती जा रही थी
पानी जैसा जो बह रहा
वह मैं था ,
मै उजाले में डरावने आदमी से नमस्ते करने लगा ,
मेरा हारमोनियम तो
रात में ही रह गया था ,बहुत पीछे
और वह बज रहा था
बजती हैं बहुत दूर तक तन्हाइयां अक्सर
कहने में बहुत खूब है यह याद का आलम
dhanyawad sushila jee..........ek achchhi rachna padhwane keliye....:)
ReplyDeletenav varsh ki bahut bahut subhkamnayen.........
Shushila jee namaskar,
ReplyDeleteUday prakash jee ki yeh kavta punah padh kar hamne Sahitya Akadami ka celebration kar liya.Aur kya likh rahin hain?Kabhi mere blog par bhi najar daudayen.
bhut sargrbhit kvita ke liye aapdono ko dhnywaad .
ReplyDeleteप्रेम और अनकहे दर्द को बयान करती यह कविता उनकी काव्यात्मक ऊँचाइयों को अभिव्यक्त करती है ! नये साल की शुभकामनाओं के साथ , तुम्हे बहुत बहुत धन्यवाद इस कविता के लिए !
ReplyDeleteशुक्रिया इसे यहाँ बांटने के लिए
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर.
ReplyDeleteएक बहुत ही अच्छी कविता पढ़ने को मिली..आभार आप का सुशीला जी.
ReplyDelete.............
नववर्ष 2011 आपके व आपके परिवार
के लिए ढेरों प्रसन्नताएं लाए ,शुभकामनाओं सहित-
अल्पना
नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ......स्वीकार करें ..
ReplyDeleteआशा है नव वर्ष आपके जीवन में खूब सारी खुशियाँ लेकर आएगा ....बहुत - बहुत शुभकामना
हिंदी के यशस्वी कवि उदय प्रकाश जी को यहाँ पढ़कर आनंद आया ..इस प्रस्तुति के लिए आपका आभार
ReplyDeletenice blog...
ReplyDeletePlease visit my blog..
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बहुत बहुआयामी रचना ... कवि का मन समझपाना आसान नही होता कभी कभी .......आपको और परिवार में सभी को नव वर्ष मंगलमय हो ...
ReplyDeleteएक रहस्यमई प्रेम कविता.अच्छा लगा पढना.
ReplyDeleteनव वर्ष की शुभकामनाएँ.
एक अदभुत रचना। मजा आ गया।
ReplyDeleteनव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
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Behtreen Rachna se parichay karane k liye didi ji shukriya
ReplyDeleteयह कविता यहाँ पढवाने के लिए बहुत बहुत आभार ...
ReplyDeleteअर्श
आप सभी का हार्दिक आभार...ध्न्यवाद ।
ReplyDeleteसपने में बजते हारमोनियम कभी सच नहीं होते.. सुबह होते ही छूट जाते हैं. अक्सर लडकियां सपने में ही हंसती हैं. अच्छी कविता !
ReplyDeleteयह उदय प्रकाश की एक घटिया कविता है। दरअसल, उदय प्रकाश अच्छी कविता लिख पाने के नाकाबिल हैं। मैं इसे अश्लील कविता मानता हूँ। उदय प्रकाश प्रचार के बल पर कवि बने। कवि होने की लियाकत उनमें है नहीं।
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