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Monday, November 22, 2010

इस बार .........

इस बार 
जब आयेगा वसंत 
तो बस 
तुम्हारे लिए 
वसंत की हवा 
वसंत की धूप 
वसंत की  नमी 
वसंत की चाँदनी 
सब कुछ होगी 
तुम पर न्योछावर 
जितने भी फूल 
खिलेंगे इस बार 
सबके सब 
तुम गूँथ देना मेरी चोटी मे 
उन फूलों की पूरी सुगंध 
करेगी यात्रा
बस  
तुम्हारे सांसों की । 

31 comments:

  1. क्योंकि इस बार प्रेम, तुम हों ...इसलिए हर बार की तरह नहीं होगा बसंत !! क्यों सखि ! ऐसा !! प्रेम के रंग में डूबी हुई कविता .बधाई !!

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  2. प्रेम के रंग में डूबी बेमिसाल कविता...

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  3. सुशीला जी सुंदर रचना के लिए धन्यवाद...

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  4. तुम पर न्योछावर
    जितने भी फूल
    खिलेंगे इस बार
    सबके सब ...सबके सब!!
    आपकी नज्में हमेशा पढ़ने में भली भली सी लगती है....

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  5. vasant ki hava, vasnat ki nami, vasant ki dhoop aur vasant ki chandani mein vasant ki trah mahakti kavita. sach badi pyaari hai ..

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  6. बस! इसी वसंत की प्रतीक्षा में मन वसंती हो पुकार रहा है....वसंत...वसंत....और सिर्फ वसंत...

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  7. प्रेम की अनूठी उँचाइयों को छू रही है ये रचना ... समर्पण का पावन भाव लिए ... लाजवाब ..

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  8. अग्रिम क्षमा के साथ मेरा यह बयान! .. आया था.. इस रचना को पढ़ा...कुछ कहना दूसरों के आस्वादन से ज्यादती कर सकता है ..सो बिना कुछ कहे लौट लिया .. "सब कुछ होगी तुम पर न्योछावर" .. सहमति नहीं बन पाती .. वह क्या प्रेम जो बाँध दे किसी एक खूंटे से(भले ही भगवान) .. प्रेम वह जो धूप और बरसात सा बरस पड़े सब पर बिना किसी भेद भाव के .. लेकिन, प्रेम पर रची किसी भी कृति के लिए प्रभू चरणों पर चढे फूल सा आदर भी रहता है मन में तो क्या करता चुप रहने के सिवा !

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  9. खुबसूरत कविता जो वक्‍त से पहले वसंत की चाप दे जाती है...दिल की वादियों में वसंत लहलहाने लगता है...

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  10. वाह, प्रेममई सुन्दर कविता !

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  11. आ हा ! प्रेम व समर्पण के भावो से सराबोर रचना बहुत सुन्दर्।

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  12. प्रेम और सौन्दर्य की अद्भुत कविता ! बेखुदी का सुंदर रूप मन को मोहित कर लेता है ! बधाई !!

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  13. वसंत आता नहीं ले आया जाता है, आपने ला दिया । शुक्रिया स्वीकारेंगी न !

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  14. सुंदर एहसास जगाती प्यारी कविता।

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  15. वसंत को चोटी में गूंथ लेना.. नए तरह का विम्ब है... आपकी कविता प्रेम को नया कलेवर, नया तेज देती है... सुन्दर !

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  16. सब कुछ होगी
    तुम पर न्योछावर
    पूरी कविता में समर्पण का भाव प्रबल है ...शुभकामनायें
    चलते -चलते पर आपका स्वागत है

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  17. थोडा सा रूमानी हो जाए !!!!!

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  18. बसंत के आने मे अभी समय है लेकिन आपकी कविता से उसकी महक आ रही है ।

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  19. सुशीला जी आप सचमुच बहुत अच्छा लिखती हैं. बहुत छोटी बाते बहुत बड़े तरीके से कहना आपकी विशेषता है.

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  20. बहुत बदिया लिखती है आप , सच ये बात जानते सब है पर आपने इसे इतना अच्छा पिरोया है. फूलूँ की सुगंध की भांति आप यहाँ इस कविता मैं महक रही है .शिबानी दस

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  21. सुन्दर अभिव्यक्ति .

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  22. मैंने अपना पुराना ब्लॉग खो दिया है..
    कृपया मेरे नए ब्लॉग को फोलो करें... मेरा नया बसेरा.......

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  23. खूबसूरत कविताएँ!.... लेकिन पता नही क्यूँ ऐसा लगता है कि थोड़ा जल्दबाजी में लिखी गईं । कविताओं में और डूबिए.... तो हम पाठकों को कुछ और चमकदार मोती मिलें ।

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  24. आप सभी का बहुत बहुत आभार !

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  25. Didi ji sunder rachna k liye badhai .der se aane k liye maafi chahta hu ..........

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  26. बहुत अच्छी प्रस्तुति| धन्यवाद|

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