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Friday, March 12, 2010

चाहना...


मुझे नीड़ नहीं
बस, मुझे थोड़ी सी छांव चाहिए
कोई एक टहनी
या कोई नर्म फुनगी
या फिर आकाश का एक छोटा कोना
तुम्हारे नीले वितान तले
भरनी है मुझको उड़ान

42 comments:

  1. बढ़िया छोटी -सी सुन्दर कविता..
    amitraghat.blogspot.com

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  2. chhotee se lekin bahut sundar rachna....badhaiii

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  3. बेहद खूबसूरत, बहुत मृदु. आप बहुत अच्छा लिखती हैं सुशीला जी.

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  4. मुझे नीड़ नहीं
    बस, मुझे थोड़ी सी छांव चाहिए!!! बहुत सुंदर कविता है कबूतर के पंखों की तरह ! बधाई !

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  5. Bahut kam shabdo me bahut badi va ghari baat ...Sundar!!
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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  6. तुम्हारे नीले वितान तले
    भरनी है मुझको उड़ान
    क्या ख्वाहिश है थोड़ी सी छाव और एक उड़ान
    बहुत खूब

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  7. जब तक प्रिय के आकाश का एक कोना अपना नहीं होगा तब तक नीड में छाव नहीं होगी. सुंदर है . बधाई !

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  8. यू ही लिखती रहिये,यकीन मानिये हराभरा पेड़ और अनंत आकाश से, एक दिन पता भी नही लगेगा और मुलाकात हो जाएगी.

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  9. लगता है सुशीला जी हमारे ख्याल साथ चलते हैं!

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  10. कम शब्दों में बात कहने का हुनर हर किसी को नहीं आता लेकिन आप इस विधा में पारंगत हैं...बहुत ही प्रभाव शाली रचना है ये आपकी...मन्त्र मुग्ध कर दिया और जो आपने चित्र साथ में दिया वो भी लाजवाब है...बहुत बहुत बधाई...
    नीरज

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  11. सुन्दर प्रस्तुति....बधाई !!
    ______________
    सामुदायिक ब्लॉग "ताका-झांकी" (http://tak-jhank.blogspot.com)पर आपका स्वागत है. आप भी इस पर लिख सकते हैं.

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  12. कितनी मासूम सी चाहत है लेकिन कितने सारे अर्थ है इसमें । मुझे तो कहीं वह नीली छतरीवाला भी दिखाई दे रहा है ।

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  13. laghuta me gurutaa....gaagar mey saagar...aapki छ्oti-sipyaari-si kavita par yahi kahaa ja sakta hai. badhai.

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  14. इस चाहना का जवाब नहीं, लेकिन इसमें वो विवादी स्‍वर नहीं, जिससे आप अनेकार्थ पैदा कर देती हैं।

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  15. मुझे नीड़ नहीं
    बस, मुझे थोड़ी सी छांव चाहिए
    -----------------------
    कम शब्दों में बड़ी बात..सुन्दर भावाभिव्यक्ति...उम्दा रचना.

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  16. आप जैसे कुछ ब्लॉग पढ़कर खुद लिखने का मन नहीं करता.
    देर से आपके ब्लॉग में हूँ...
    आप अच्छा लिखती हैं ये कहना भी छोटा मुह बड़ी बात होगी...

    1)
    :उसकी अंतहीन सीमाओं मे
    मेरा वजूद
    ले चुका है प्रवेश
    बिना किसी प्रवेशपत्र के
    "

    स्थूल से शुष्म हो जाना शायद इसी को कहते हैं. प्रेम कविता है या भक्ति ?


    2)

    "मेरे प्रेम की गठरी में
    थोड़े शब्द हैं
    तो ढेर सारा मौन है
    कुछ उदासियाँ हैं
    तो अनंत हसीं है

    " उपयुक्त lines जरा साधारण लगा पर बाकी कविता 'Awesome' . हाँ शायद शुरुआत ऐसे ही ज़रूरी हो.

    3) किस कसी को quote करूँ? पूरा ब्लॉग ही किसी पुस्तक की तरह पठनीय है...
    देर से हूँ और देर तक रहूँगा...

    कुछ जगह बनाकर
    जरुर लाना
    ठूंठ हुई उम्र के लिए
    नई नर्म कोंपलें
    अंधेरों के लिए
    थोडा सा सूरज
    तपते वक्त के लिए
    थोड़ी सी चांदनी
    लाना
    वसंत के लिए .

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  17. कथाक्रम मेरे हाथ में है .उसमे आपकी कविता पढ़ी .माँ के लिए बेटी की फ़िक्र की सम्वेदना को शब्दों में आकार लिए भी देखा .बेटी होने के नाते उसे दिल से महसूस भी किया मगर आगत के सन्दर्भ में इतनी उदासी क्यों आप आज की नारी है कलम आप के हाथ में है भविष्य के पन्ने पर सुनहरे अक्षर लिखने की पूरी ताब .फिर एक और दमदार रचना के इंतजार में .......
    राजवंत राज .

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  18. शरद जी ! उसे मेरा पता बता देना प्लीज !!!

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  19. सुन्दर! नीली छतरी वाला निकल चुका है लखनऊ के लिये। पहुंचता ही होगा।

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  20. जबरदस्त रचना!!वाह!

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  21. बहुत शानदार लिखती हैं आप.

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  22. निशब्द कर दिया आपकी इस कविता ने...मन के भावों को कितनी सुन्दरता से शब्द दे दिए हैं...इतने कम लफ़्ज़ों में इतने गहरे भाव उकेर दिए...बहुत सुन्दर

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  23. "लिख सकूँ तो - प्यार लिखना चाहती हूँ ठीक आदमजात - सी बेखौफ दिखना चाहती हूँ"

    शायद यह पहला परिचय है जिससे इतना प्रभावित हुआ ....इसी रास्ते चलें ! शुभकामनायें !

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  24. कविता छोटी होते हुए भी संवेदना के स्तर पर अनंत विस्तार लिए हुए है.सुंदर और मार्मिक रचना है.बधाई! दिल के अरमानों को झुठलाना कठिन है.चाहना आसान है, पाना कठिन है. किन्तु जहाँ चाह है वहां राह है.
    लक्ष्मी कान्त त्रिपाठी

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  25. कुछ न कह कर सब कुछ कह दिया !

    इसे कहते हैं गागर में सागर भरना !

    बात भीतर तक चुभ गई ........

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  26. सुन्दर, सार्थक और भावपूर्ण कविता..बधाई.


    ________________
    ''शब्द-सृजन की ओर" पर- गौरैया कहाँ से आयेगी

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  27. बहुत खूब ......!!

    सुशीला जी अच्छा लिखती हैं आप ......!!

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  28. सुशीला जी...आपको मेरे आगमन की सूचना है ये। क्या कमेंट लिंखे...लोगो ने कितना प्रेम उड़ेला है। जरा सी चाहत में कितना कुछ मिल जाता है..देखिए..यहां तो बहुत कुछ चाहने क चक्कर में जो पास है वो भी छूट जाता है.कहीं बरकतो की हैं बारिशें, कहीं तिश्नगी का हिसाब है। लिखते रहिए..हमें जिलाए रखिए.

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  29. छोटी सी चाहत ... हसीन ख्वाब ... बेमिसाल ....

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  30. आप सभी का हार्दिक धन्यवाद .....आप सभी का उत्साहवर्धन मेरी अमूल्य पूंजी है .

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  31. अभी तो मैं भी बाकी हूँ कमेन्ट लिखने के लिए...बहुत अच्छा लिखती हैं आप.



    ----------------------
    "पाखी की दुनिया" में इस बार पोर्टब्लेयर के खूबसूरत म्यूजियम की सैर

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  32. बेहद खूबसूरत, बहुत मृदु. आप बहुत अच्छा लिखती हैं सुशीला जी.

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  33. शायद १५ दिन ..
    हाँ इतने दिन पहले आप को पढना शुरू किया था.आज तक इतनी मुश्किल किसी को टिप्पणी लिखने में नहीं हुई.ऐसी कविताये है जिनमे रस है.बस पढ़ते जाओ,

    ..आनंद..

    इस कविता को कितनी ही बार पढ़ चुकी हूँ.कितनी ज़रा सी ही ख्वाहिश है,बहुत ज्यादा नहीं.बिम्ब अनूठे और बेहद खूबसूरत है.मेरी टिप्पणी आपके लेखन के लिए काफी नहीं है..

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  34. maine aaj pehli baar apko pada hai pad kar laga ki ab tak maine kaafi kuch miss kar diya u r really a good one blogger ........
    kam shabdo main bahut kuch ..........

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  35. ooh jindagee me kabhi kabhi kitni der ho jati hai...
    aisi hi deri ka anubhaw aaj aapki rachnao ko padhkar hua...
    par thanks god ki internet ke is mahamayajaal me mai is abhiwyakti tak pahuch paya....

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  36. इस चाहना का जवाब नहीं, लेकिन इसमें वो विवादी स्‍वर नहीं, जिससे आप अनेकार्थ पैदा कर देती हैं।

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  37. Arpita ने तारीफ़ की थी तो अतीश्योक्ती सी लगी थी.

    क्षमा चाहता हूँ.

    भावविव्हल हो कर बैठा हूँ बस थोड़े सा ही पढ़ कर.

    बुरा मानें या भला, उससे तो चिपका ही हूं, अब मैं बन गया चिपकू आप का भी.

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