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Thursday, June 25, 2009

गेंद और मैं

गेंद थी मै
लेकर चली गई
यमुना की अतल गहराइयों में
और जब उबरे
लहरों पर नर्तन था
और थी बांसुरी की धुन ।

4 comments:

  1. अरे गज़ब....ये क्या कर रही हो आप....मैं भी तो डूबा ही जा रहा हूँ....
    यमुना की अतलगहराईयों में.....साथ ही आपकी गहरी रचनाओं में.....!!

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  2. janati hain kalindi ke tat par kaliya ke phan par jb nritya kar rahe the tumhare,mere 'kanhaa' ,main bhi wanhi thi,mujhe nhi pahchana sakhi tumne ?
    chalo ek baar phir dohrao wahi baat... is baar main bhi hungee tumhare sath wapas.
    indu puri

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